जिन्हें तुम अछूत मानते थे,
वही तुम्हारी आज़ादी का कारण थे।

जहाँ से तुमने चुप्पी तोड़ी,
वहीं से वो तुम्हारी आगाज बने।

जहाँ तुमने बदलाव खोजा,
वहीं से वो तुम्हारी शुरुआत बने।

जहाँ से तुमने देखना सीखा,
वहीं से वो तुम्हारे सपने बने।

तुम लिखने लगे, पढ़ने लगे,हसने लगे
घर के अलावा बाहर की ज़िंदगी भी एक दुनिया बन गई
वजह वो थे।

तुम जीवित थे, मगर प्राण वो थे।
वो अछूत थे, मगर तुम्हारी आवाज़ थे।
वो बाबासाहेब थे।।

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भाग्यश्री साहू
एम. ए. राजनीति विज्ञान
मा मांनीकेस्वरी विश्वविद्यालय कालाहांडी